“मेरा बच्चा बड़ा होकर क्या बनेगा?“-

यह एक ऐसा सवाल है जो हर एक माता-पिता के ज़हन में घूमता रहता हैं। बच्चा चाहे छोटा हो या बड़ा, माता-पिता के लिए यह सवाल बहुत एहम होता है। यहाँ माता-पिता अपना अधूरा सपना अपने बच्चे की आँखों से देखने की कोशिश करते हैं। पर ये ज़रूरी तो नहीं की जो हमारा सपना हों, वही सपना हमारे बच्चे भी देखें।

हर एक माता – पिता यहीं चाहते है की उनका बच्चा हर एक कक्षा में या हर एक श्रेणी में अव्वल हो। और यह तो बहुत अच्छी बात हैं। अगर हम अपने बच्चे के बारे में अच्छा नहीं सोचेंगे तो फिर और कौन सोचेगा?? पर कहीं ना कहीं हम अपनी अच्छी सोच अपने बच्चों पे थोपने लगते हैं। हम सब माता-पिता ये नहीं सोचते की हर एक बच्चे की अपनी एक अलग काबिलियत होती है। हर एक बच्चे में अपना एक हुनर होता है। बस हमे उस हुनर को उभारने की कोशिश करनी चाहिये।

सभी बच्चों के लिए उनके माता-पिता एक मार्ग-दर्शक होते है। सबसे पहले हमारा बच्चा हमारे पास ही हमसे सलाह मांगने आता है। तो ऐसे में हमे एक अच्छे मार्ग-दर्शक और शुभ-चिंतक होने के नाते उसे सही दिशा दिखानी चाहिए, नाकि अपने सपनों का बोझ उसके नाज़ुक कन्धों पर डालना चाहिए।

जब हम अपना अधूरा सपना अपने बच्चों के नाज़ुक कन्धों पर डालते है, तब हमारा बच्चा उस सपने को पूरा तो कर लेता है मगर कहीं ना कहीं उसके अंदर एक अधूरापन होता है। मैंने अपने कई दोस्तों से इस विषय पे बात की है। ज़्यादातर सबका यही कहना है की “हम तो अपने कैरियर में कुछ और करना चाहते थे पर मम्मी-पापा की यही इच्छा थी” । तो फिर आप ही बताइये की जिस सपने को पूरा करने के बाद भी दिल खुश नहीं है, तो फिर वह सपना कैसा..?

हमेशा हम सबको अपने बच्चों की काबिलियत के अनुसार ही उनके जीवन लक्ष्य का मार्ग-दर्शन करवाना चाहिए।

ज़रूरी नहीं की हर बच्चा डॉक्टर या इंजीनियर ही बने। वो बच्चा एक बहुत अच्छा शिक्षक, या एक बहुत अच्छा साहित्यकार, या एक उत्तम श्रेणी का चित्रकार भी बन सकता है। आखिरकार, एक ही हाथ की पाँचों उंगलिया बराबर तो नहीं होती, पर उन पाँचों उँगलियों से ही हाथ बनता है और सबको एक साथ करने पर बनती है मुट्ठी।

तो इसीलिए बनिए अपने बच्चों के सबसे अच्छे मार्ग-दर्शक और सलाहकार और मदद कीजिये अपने बच्चों के सपने को पूरा करने में। ताकि फिर चिंता ना रहे की “मेरा बच्चा बड़ा होकर क्या बनेगा…!!”